MEA on OHCHR Remarks: दिल्ली में प्रदर्शन पर UN की टिप्पणी से नाराज भारत, विदेश मंत्रालय ने यह कहा- आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की टिप्पणी पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 14 अक्टूबर को कहा कि OHCHR की ओर से जताई गई चिंताएं अनुचित और अस्वीकार्य हैं, क्योंकि यह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान है। उन्होंने संगठन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में होने वाले प्रदर्शनों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई पर इसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी जाती। भारत ने इस मामले को देश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों से जुड़ा मुद्दा बताया है।
रणधीर जायसवाल ने यह कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध जताने का अधिकार संविधान के तहत सुनिश्चित है। उन्होंने यह कहा कि इस अधिकार का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की शर्तों के अधीन होता है। उनके मुताबिक, भारत में कानून लागू करने वाली एजेंसियां कानून के दायरे में काम करती हैं और किसी भी शिकायत के निवारण के लिए न्यायपालिका उपलब्ध है। विदेश मंत्रालय ने OHCHR की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि इस तरह की प्रतिक्रिया से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने OHCHR पर चुनिंदा मामलों में ही चिंता जताने का आरोप लगाया। उन्होंने यह कहा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों और कानून प्रवर्तन की कार्रवाइयों के संबंध में संगठन ने अपने सार्वजनिक बयानों में वैसी प्रतिक्रिया नहीं दी, जैसी भारत के प्रकरण में देखने को मिली। जायसवाल ने चेतावनी दी कि यदि यही रवैया जारी रहा, तो इस घटनाक्रम से बहुपक्षवाद में लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है और संगठन की साख पर भी असर पड़ सकता है। यह भारत सरकार का आधिकारिक पक्ष है, जबकि OHCHR ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत के संबंध में अपनी चिंताएं जताई थीं।
यह विवाद दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन और उसहोने के बाद की गई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने प्रदर्शनकारियों, विरोध के आयोजकों, नागरिक समाज से जुड़े लोगों, वकीलों और पत्रकारों की बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी। दूसरी ओर, भारतीय अधिकारियों ने प्रदर्शन के समय के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लागू नियमों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस मुद्दे पर भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के रुख में स्पष्ट अंतर सामने आया है।
इसी मीडिया ब्रीफिंग के समय के दौरान रणधीर जायसवाल ने बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की पहली बैठक और दिल्ली घोषणा के संबंध में भी जानकारी दी। उन्होंने इस बारे में बताया कि भारत ने इस बैठक की मेजबानी की, जिसमें बिम्सटेक के सभी सदस्य देशों ने भाग लिया। बैठक होने के बाद दिल्ली घोषणा को स्वीकार किया गया, जिसके तहत सदस्य देशों ने सुरक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। इस घोषणा में आतंकवाद से मुकाबला, मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई और सीमा पार संगठित अपराध से निपटने जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बिम्सटेक यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए इन देशों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जाता है। दिल्ली घोषणा के जरिए सदस्य देशों ने आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े खतरों के खिलाफ सहयोग को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है। इस तरह विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में एक ओर दिल्ली प्रदर्शन पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी के संबंध में भारत का विरोध सामने आया, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के संबंध में बिम्सटेक देशों की साझा प्रतिबद्धता भी रेखांकित की गई।


