Delhi Police Protest: दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर महिलाओं का प्रदर्शन, SIR और पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी के आरोपों के संबंध में उठाई आवाज

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और हालिया विरोध प्रदर्शनों के समय के दौरान महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी के मुद्दे पर शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर महिला संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हाल के प्रदर्शनों के समय के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। इसके इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों के संबंध में भी विरोध जताया।

प्रदर्शन में कई महिला और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। महिला संगठनों ने पुलिस अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने वाली महिलाओं को सुरक्षा मिलनी चाहिए। प्रदर्शन के समय के दौरान दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारे भी लगाए गए।

महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायतों पर कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधियों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से मिलने के लिए समय भी मांगा, ताकि वे अपनी शिकायतें सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रख सकें। संगठनों का कहना है कि शिकायतों की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह विरोध प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हाल में हुए प्रदर्शनों होने के बाद सामने आया है। इन प्रदर्शनों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के संबंध में सवाल उठाए गए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर उनकी चिंताओं को दूर नहीं किया गया है। इसी विवाद के बीच पुलिस कार्रवाई के समय के दौरान महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न और शारीरिक दुर्व्यवहार के आरोप भी सामने आए हैं। महिला संगठनों ने इन आरोपों के संबंध में जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

इस घटनाक्रम से पहले 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन को कवर कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने भी दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। शिकायतें मिलने होने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने की जानकारी दी थी। महिला पत्रकारों के आरोपों की जांच जारी होने के बीच महिला संगठनों ने यह कहा है कि ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसके बावजूद, आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

महिला संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के समय के दौरान महिलाओं और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए व्यवहार के संबंध में जवाबदेही तय करने की जरूरत है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और किसी भी तरह के कथित उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पहले कुछ आरोपों को खारिज करते हुए कह चुकी है कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ महिला पुलिसकर्मियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत व्यवहार किया गया। ऐसे में पूरे प्रकरण में शिकायतों, पुलिस के पक्ष और जांच के निष्कर्षों का महत्व बढ़ गया है।

इसी क्रम में जस्टिस मोर्चा की ओर से जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित करने की मांग के संबंध में भी मार्च का आह्वान किया गया। प्रस्तावित मार्च प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से जंतर-मंतर की ओर जाना था। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि SIR के संबंध में राजनीतिक विरोध और प्रदर्शनों के समय के दौरान पुलिस के कथित व्यवहार का मुद्दा राजधानी में चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि महिला संगठनों की मांगों पर पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है और जांच में कथित घटनाओं के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।