Delhi Police Assault: राहुल गांधी के प्रदर्शन के समय के दौरान कांस्टेबल अंकित कसाना से मारपीट का आरोप, 40-50 लोगों ने घेरने का दावा; RML अस्पताल में इलाज

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के संबंध में बुधवार, 7 अक्टूबर को हुए विपक्षी प्रदर्शन के समय के दौरान दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल अंकित कसाना ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की हिरासत के समय के दौरान उन्हें करीब 40 से 50 प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने घेर लिया। उन्होंने दावा किया कि भीड़ में पुरुषों और महिलाओं दोनों के शामिल होने के समय के दौरान उनके साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। इस घटना के बाद कांस्टेबल को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण और इलाज कराया गया।

अंकित कसाना दिल्ली पुलिस की पार्लियामेंट पुलिस से जुड़े बताए जा रहे हैं और बुधवार को प्रदर्शन के समय के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा भीड़ को नियंत्रित करने की ड्यूटी पर तैनात थे। उनके मुताबिक, जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्ते में विपक्षी सांसदों और समर्थकों को पुलिस द्वारा रोकने होने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसी दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई शुरू हुई।

कांस्टेबल अंकित कसाना के मुताबिक, जैसे ही राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया, काफी संख्या में प्रदर्शनकारी पुलिस की गाड़ियों और अधिकारियों के आसपास जमा हो गए। उनका आरोप है कि इसी दौरान करीब 40 से 50 लोगों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। उन्होंने यह कहा कि भीड़ ने पहले उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उसके बाद उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

अंकित ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी वर्दी खींची और फाड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके शरीर पर नाखूनों से खरोंचा गया और उनकी उंगली पर काटा गया। उनके मुताबिक, हमले के समय के दौरान वह लगातार लोगों से उन्हें छोड़ने की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ ने उनकी बात नहीं मानी।

घायल कांस्टेबल ने अस्पताल में मीडिया से बातचीत के समय के दौरान घटना को याद करते हुए कहा कि वह उस समय काफी डर गए थे। उन्होंने इस बारे में बताया कि उन्हें अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के संबंध में भी चिंता हुई। उनके मुताबिक, पुलिसकर्मी प्रदर्शन के समय के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी करते हैं, लेकिन जब भीड़ उन्हें ही निशाना बनाती है तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।

इस घटना के बाद नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा और अन्य पुलिसकर्मियों ने अंकित कसाना को संभाला। सामने आए वीडियो में DCP को घायल और भावुक कांस्टेबल को शांत कराते हुए देखा गया। उसके बाद उन्हें इलाज और मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया।

अंकित कसाना ने यह भी दावा किया कि इस घटनाक्रम से पहले CJP के प्रदर्शन के समय के दौरान भी उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी हुई थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस और सरकार से पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उनका कहना है कि ड्यूटी के समय के दौरान पुलिसकर्मियों को भी सुरक्षा का भरोसा मिलना जरूरी है, ताकि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम बिना भय के कर सकें।

यह घटना उस समय हुई जब दिल्ली में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के संबंध में विपक्षी दल लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। बुधवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी सांसद जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उसके बाद मौके पर काफी देर तक नारेबाजी और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

प्रदर्शन के समय के दौरान पुलिस की ओर से भी प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी के आरोप लगाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने पुलिस पर प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसके महिला और पुरुष कर्मियों के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

दिल्ली पुलिस अब प्रदर्शन के समय के दौरान सामने आए वीडियो फुटेज की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कांस्टेबल अंकित कसाना के साथ कथित मारपीट में कौन लोग शामिल थे और घटना किस परिस्थिति में हुई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, ड्यूटी में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।

बुधवार के प्रदर्शन के संबंध में पुलिस ने कई वीडियो भी खंगालने शुरू किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रदर्शन के समय के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई कथित घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी। इसके बावजूद, कांस्टेबल द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हुई है और घटना में शामिल बताए जा रहे प्रदर्शनकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है।

दिल्ली में चल रहे इस राजनीतिक विवाद के बीच पुलिसकर्मी के घायल होने की घटना ने प्रदर्शन के समय के दौरान कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के संबंध में भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।