Ranji Trophy Record: चिन्मय सुतार ने 400 रन बनाकर रचा इतिहास, 78 साल बाद रणजी ट्रॉफी में दोहराया गया बड़ा कारनामा
भारतीय घरेलू क्रिकेट में मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने ऐसा ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है, जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रणजी ट्रॉफी 2026-27 के प्लेट ग्रुप मुकाबले में नागालैंड के खिलाफ खेलते हुए चिन्मय ने नाबाद 400 रन की विशाल पारी खेली। दीमापुर के सोविमा स्थित नागालैंड क्रिकेट स्टेडियम में खेली गई इस पारी के साथ वह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में एक पारी में 400 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले महाराष्ट्र के बीबी निंबालकर ने 1948-49 के रणजी सत्र में काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। करीब 78 साल बाद किसी बल्लेबाज ने रणजी ट्रॉफी में 400 रन का आंकड़ा पार किया है।
चिन्मय सुतार ने अपनी मैराथन पारी के समय के दौरान 517 गेंदों का सामना किया और 46 चौकों तथा सात छक्कों के सहयोग से नाबाद 400 रन बनाए। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य, एकाग्रता और परिस्थितियों के अनुरूप खेलने की क्षमता देखने को मिली। उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिककर नागालैंड के गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसाए रखा। मिजोरम की टीम एक समय 146 रन पर चार विकेट गंवाकर दबाव में थी, लेकिन चिन्मय ने पारी को संभालते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उन्होंने पांचवें विकेट के लिए जेहू एंडरसन के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी की। एंडरसन ने 69 रन बनाए और दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर मिजोरम की पारी को स्थिरता प्रदान की।
चिन्मय की इस पारी का सबसे खास पहलू आखिरी विकेट के लिए बनी नाबाद साझेदारी रही। जब मिजोरम ने नौ विकेट गंवा दिए थे, तब ऐसा लग रहा था कि चिन्मय को 400 रन पूरे करने का मौका नहीं मिल पाएगा। इसके बावजूद, लालरेमपुइया छकछुआक ने उनका अच्छा साथ दिया। दोनों बल्लेबाजों ने दसवें विकेट के लिए नाबाद 189 रन जोड़े। लालरेमपुइया ने 76 गेंदों पर 14 रन बनाए, जबकि चिन्मय ने अधिकांश रन खुद बनाए। इस साझेदारी ने मिजोरम को पहली पारी में नौ विकेट पर 581 रन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके बाद टीम ने अपनी पारी घोषित कर दी।
इस ऐतिहासिक पारी के समय के दौरान चिन्मय ने पृथ्वी शॉ के 379 रन के स्कोर को पीछे छोड़ दिया। पृथ्वी शॉ ने 2022-23 सत्र में मुंबई की ओर से असम के खिलाफ 379 रन बनाए थे। चिन्मय की 400 रन की पारी अब रणजी ट्रॉफी के इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी है। इस टूर्नामेंट में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड अब भी बीबी निंबालकर के नाम है, जिन्होंने 443 रन बनाकर नाबाद रहते हुए पारी समाप्त की थी। चिन्मय इस रिकॉर्ड से 44 रन दूर रह गए, लेकिन 400 रन तक पहुंचकर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी खास पहचान बना ली।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी चिन्मय सुतार ने अपना नाम एक विशिष्ट सूची में दर्ज करा लिया है। वह इस प्रारूप में 400 या उससे अधिक रन बनाने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हो गए हैं। इस सूची में ब्रायन लारा, डॉन ब्रैडमैन और हनीफ मोहम्मद जैसे महान बल्लेबाजों के नाम भी दर्ज हैं। ब्रायन लारा ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में नाबाद 501 रन की पारी खेली थी। चिन्मय की उपलब्धि की इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह है कि उन्होंने अपने फर्स्ट क्लास करियर के शुरुआती दौर में ही ऐसा प्रदर्शन किया है। नागालैंड के खिलाफ यह उनका फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दूसरा मैच था। इस घटनाक्रम से पहले उन्होंने मणिपुर के खिलाफ अपने पदार्पण मुकाबले में पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में 99 रन बनाए थे।
चिन्मय सुतार मूल रूप से मुंबई के रहने वाले हैं और उन्होंने 2026-27 सत्र से पहले मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल करने होने के बाद मिजोरम की टीम का रुख किया था। उनके पिता राजेश सुतार मुंबई की ओर से रणजी क्रिकेट खेल चुके हैं और क्रिकेट कोच भी रहे हैं। चिन्मय को क्रिकेट की शुरुआती शिक्षा परिवार से मिली। उन्होंने क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया, टाटा स्पोर्ट्स क्लब और मुंबई कस्टम्स जैसे क्लबों का प्रतिनिधित्व किया है। वह मुंबई टी20 लीग में भी खेल चुके हैं और घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत करते रहे हैं।
रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार की इस उपलब्धि ने 2026-27 सत्र को यादगार बना दिया है। 517 गेंदों पर नाबाद 400 रन बनाना केवल बड़े स्कोर का मामला नहीं, बल्कि लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक रूप से एकाग्र बने रहने की मिसाल भी है। मिजोरम ने उनकी पारी की बदौलत पहली पारी में 581 रन बनाकर नागालैंड के सामने चुनौतीपूर्ण स्कोर रखा। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में 78 साल बाद दोहराई गई यह उपलब्धि भारतीय घरेलू क्रिकेट के महत्वपूर्ण रिकॉर्डों में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।