Bharatiya Mazdoor Sangh Kashmir: कश्मीर घाटी में पहली बार खुला आरएसएस समर्थित बीएमएस का सार्वजनिक दफ्तर, पुलवामा में संभागीय कार्यालय शुरू

जम्मू-कश्मीर की कश्मीर घाटी में एक ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से वैचारिक रूप से जुड़े देश के सबसे बड़े केंद्रीय श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपना संभागीय कार्यालय खोल दिया है। दक्षिण कश्मीर के अशांत माने जाने वाले पुलवामा जिले में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोरा के निकट बारसू गांव में इस कार्यालय की शुरुआत की गई है। घाटी में दशकों तक भूमिगत या सीमित स्तर पर कार्य करने होने के बाद बीएमएस द्वारा खुले तौर पर अपने बोर्ड और झंडे के साथ कार्यालय स्थापित करने को कश्मीर में बदलते सामाजिक व सुरक्षा परिदृश्य का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

बीएमएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक भव्य कार्यक्रम के समय के दौरान इस संभागीय कार्यालय का उद्घाटन किया। संगठन के कश्मीर संभाग के प्रभारी समीर कुचे ने यह कहा कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरसन होने के बाद घाटी के जमीनी माहौल में व्यापक सकारात्मक बदलाव आया है, जिसकी वजह से अब संगठन के लिए जनता और मेहनतकश अवाम के बीच खुलकर काम करने का अनुकूल समय आ गया है। उन्होंने आलोचकों के आरोपों का खंडन करते हुए दो टूक कहा कि बीएमएस न तो भारतीय जनता पार्टी की कठपुतली है और न ही किसी विशेष धर्म का संगठन है। कुचे ने स्पष्ट किया कि बीएमएस विशुद्ध रूप से मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों और कर्मचारियों के अधिकारों, उचित न्यूनतम वेतन और कार्यस्थल पर सम्मान के लिए संघर्ष करने वाला एक गैर-राजनीतिक ट्रेड यूनियन है।

समीर कुचे ने दावा किया कि वर्तमान में कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों में 20 से अधिक स्थानीय कर्मचारी और मजदूर यूनियनें बीएमएस से संबद्ध हो चुकी हैं, जो करीब 30 हजार श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके बावजूद, इस सार्वजनिक कार्यालय के खुलने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तीखी रही हैं। माकपा के वरिष्ठ विधायक और सीटू (CITU) के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने इसे सरकार द्वारा प्रायोजित कदम करार देते हुए आरोप लगाया कि घाटी के स्वायत्त श्रमिक आंदोलनों को कमजोर करने के लिए संघ परिवार के संगठनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन राजनीतिक बहसों के बीच बीएमएस का कहना है कि उसका ध्यान स्थानीय कश्मीरी युवाओं और मजदूरों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने और श्रम कानूनों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कराने पर केंद्रित रहेगा।