Autism Awareness: ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए 35वां निःशुल्क उपचार शिविर, परिवारों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर
रिपोर्ट: आशीष कुमार
पूर्वी दिल्ली में ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए श्री गोपाल कृष्ण अरोड़ा न्यास ट्रस्ट की ओर से निःशुल्क उपचार एवं मार्गदर्शन शिविर आयोजित किया गया। डॉ. बीएस जौहरी के नेतृत्व में आयोजित यह अभियान का 35वां शिविर था, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे बच्चों और उनके परिवारों ने उपचार, परामर्श और मार्गदर्शन का लाभ लिया।

शिविर का उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े विकासात्मक मुद्दों के संबंध में परिवारों के बीच जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को समय रहते विशेषज्ञों की सलाह एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना रहा। आयोजकों के अनुसार, विशेष जरूरत वाले बच्चों के उपचार के साथ उनके परिवारों को सही जानकारी देना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आयुषधाम शोध संस्थान के संस्थापक एवं नाड़ी वैद्य राकेश कुमार ने परिवार के वातावरण और बच्चे के विकास के संबंध में अपनी बात रखी। उन्होंने गर्भावस्था के समय के दौरान घर में शांतिपूर्ण और सकारात्मक माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, घरेलू हिंसा, लगातार तनाव और पारिवारिक विवाद जैसी परिस्थितियां गर्भवती महिला के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं और गर्भावस्था के समय के दौरान मां और बच्चे के स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।

हालांकि ऑटिज्म के कारणों के संबंध में चिकित्सा विज्ञान की स्थिति इस घटनाक्रम से कहीं अधिक व्यापक है। वैज्ञानिक संस्थानों के अनुसार ऑटिज्म का कोई एक कारण निर्धारित नहीं है। आनुवंशिक, जैविक और कुछ पर्यावरणीय कारकों के बीच जटिल संबंध इसके विकास में भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए किसी एक पारिवारिक परिस्थिति को ऑटिज्म का निश्चित कारण मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
शिविर में परिवारों से बच्चों के विकास में किसी भी तरह की असामान्य देरी या व्यवहार संबंधी चिंता को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की गई। विशेषज्ञों की सलाह और समय पर मूल्यांकन से बच्चे की जरूरतों को समझने तथा आवश्यक सहायता शुरू करने में मदद मिल सकती है। ऑटिज्म की पहचान के लिए डॉक्टर बच्चे के विकास, व्यवहार और संचार से जुड़ी जानकारी का आकलन करते हैं और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से विस्तृत मूल्यांकन कराया जाता है।

ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें सामाजिक संपर्क, संचार और व्यवहार के अलग-अलग पैटर्न देखने को मिल सकते हैं। हर बच्चे में इसके लक्षण और जरूरतें अलग हो सकती हैं। इसी वजह से बच्चों के लिए सहायता और उपचार की योजना भी उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तय की जाती है।

आयोजकों के मुताबिक, लगातार आयोजित किए जा रहे इन शिविरों का उद्देश्य ऐसे बच्चों और उनके परिवारों को उपचार एवं मार्गदर्शन की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें शुरुआती स्तर पर सही दिशा मिल सके। शिविर में पहुंचे परिवारों को बच्चों की देखभाल, विकास और विशेषज्ञों से परामर्श लेने के संबंध में भी जानकारी दी गई।

आयोजकों ने इस बारे में बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अगला निःशुल्क उपचार शिविर 10 जनवरी 2027 को आयोजित किया जाएगा। उनका कहना है कि विशेष जरूरत वाले बच्चों के परिवारों तक उपचार और सही जानकारी पहुंचाने के लिए ऐसे प्रयास आगे भी जारी रखे जाएंगे।

