By-Election 2026: 6 सीटों पर मतदान खत्म, मदुरंतकम में सबसे ज्यादा वोटिंग; बंगाल में हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी से सियासी घमासान

देश के चार राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में मंगलवार को छह सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया। पांच विधानसभा सीटों और असम की नगांव लोकसभा सीट पर सुबह से ही मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला। मतदान खत्म होने होने के बाद अब सभी की नजर 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर है। चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान के समय के दौरान जो मतदाता निर्धारित समय पर कतार में मौजूद थे, उन्हें वोट डालने का मौका दिया गया।

तमिलनाडु की मदुरंतकम विधानसभा सीट पर शाम 5 बजे तक सबसे ज्यादा 83.86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। धारापुरम में 78.53 प्रतिशत वोट पड़े। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 79.39 प्रतिशत और रेजीनगर में 78.42 प्रतिशत मतदान हुआ। पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट पर 78.83 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। वहीं असम की नगांव लोकसभा सीट पर करीब 76 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर मतदान के समय के दौरान राजनीतिक माहौल सबसे ज्यादा गर्म रहा। रेजीनगर में आम जनता उन्नयन पार्टी यानी AJUP के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस की कार्रवाई होने के बाद उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद रेजीनगर से चुनाव मैदान में हैं।

हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है और मतदाताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के साथ अन्याय हो रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को नियमों के तहत बताया और कहा कि मतदान के समय के दौरान किसी दूसरे बूथ पर जाकर हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने बूथ से बाहर जाकर दूसरे बूथ पर हस्तक्षेप करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने यह कहा कि अगर वह खुद भी किसी दूसरे बूथ पर जाकर हस्तक्षेप करेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

रेजीनगर सीट पर मुकाबला बहुकोणीय रहा। यहां भाजपा, कांग्रेस, टीएमसी के अलग-अलग धड़े, CPI(M) और AJUP के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। AJUP की ओर से हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद मैदान में हैं। मुस्लिम बहुल इस सीट पर चुनाव प्रचार के समय के दौरान भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज रहे थे।

नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने मतदान से पहले आरोप लगाया कि उनके पोलिंग एजेंटों को धमकाया गया और कुछ एजेंटों को जबरन वहां से हटाया गया। उन्होंने यह कहा कि हर मतदाता को बिना किसी दबाव के मतदान करने का अधिकार मिलना चाहिए। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग के सामने इन आरोपों के संबंध में शिकायत भी की गई।

नंदीग्राम में मतदान से ठीक एक दिन पहले चुनाव आयोग ने थाने के प्रभारी को भी बदल दिया था। अजय कुमार मिश्रा की जगह देबाशीष सरकार को नया प्रभारी बनाया गया। विपक्षी दलों ने पहले अधिकारी की निष्पक्षता के संबंध में शिकायत की थी। उसके बाद आयोग ने यह बदलाव किया।

तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर भी मतदाताओं ने काफी संख्या में वोट डाले। मदुरंतकम में 83.86 प्रतिशत और धारापुरम में 78.53 प्रतिशत मतदान शाम 5 बजे तक दर्ज किया गया। दोनों सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं और इन उपचुनावों को तमिलनाडु की नई राजनीतिक परिस्थितियों में खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

धारापुरम में मतदान के समय के दौरान एक मतदान अधिकारी को ड्यूटी से हटा दिया गया। आरोप था कि अधिकारी ने एक बुजुर्ग महिला मतदाता को एक विशेष चुनाव चिह्न वाले उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए कहा। उसके बाद मतदान केंद्र पर विवाद हुआ। राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंटों ने अधिकारी का विरोध किया, जिसहोने के बाद अधिकारी को वहां से हटाकर दूसरे कर्मचारी को जिम्मेदारी दी गई। कुछ समय तक मतदान प्रभावित रहने होने के बाद प्रक्रिया फिर शुरू हुई।

असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। यहां भाजपा, कांग्रेस और AIUDF के बीच मुख्य मुकाबला रहा। मतदान के समय के दौरान कुछ बूथों पर EVM से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों की सूचना मिली, लेकिन मशीनों को बदलकर मतदान प्रक्रिया जारी रखी गई। नगांव में करीब 76 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर भी मतदाताओं ने काफी संख्या में मतदान किया। यहां शाम 5 बजे तक 78.83 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। यह सीट मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के दूसरी सीट को अपने पास रखने के लिए थट्टनचावडी से इस्तीफा देने होने के बाद खाली हुई थी। इसलिए इस उपचुनाव को उनकी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

इन छह सीटों के उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित होंगे। नतीजों से किसी सरकार का भविष्य सीधे तौर पर तय नहीं होगा, लेकिन इन चुनावों से अलग-अलग दलों की जमीनी पकड़ और हालिया विधानसभा चुनावों होने के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत जरूर मिलेगा। खासतौर पर पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों तथा तमिलनाडु की दोनों सीटों के नतीजों पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।